UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 23 भूमि

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 23 भूमि

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बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
प्रकृति द्वारा प्रदत्त निःशुल्क उपहार है।
(a) श्रम
(b) धन
(c) भूमि
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) भूमि

प्रश्न 2.
भूमि उत्पादन का…….साधन है।
(a) सक्रिय
(b) निष्क्रिये
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों :
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) निष्क्रिय

प्रश्न 3.
भूमि की विशेषता है। (2018)
(a) असीमित भूमि
(b) सक्रिय साधन
(c) अनाशवान
(d) गतिशील
उत्तर:
(c) अनाशवान

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
क्या भूमि को भू-स्वामी से पृथक् नहीं किया जा सकता है?
उत्तर:
हाँ

प्रश्न 2.
क्या भूमि का आशय प्रकृति-प्रदत्त सभी निःशुल्क उपहारों से है। (2014)
उत्तर:
हाँ

प्रश्न 3.
भूमि उत्पादन का साधन है/नहीं है। (2007)
उत्तर:
साधन है।

प्रश्न 4.
भूमि उत्पादन का सक्रिय साधन है/नहीं है। (2008)
उत्तर:
नहीं है।

प्रश्न 5.
भूमि उत्पादन का अनिवार्य/गौण उपादान है।
उत्तर:
अनिवार्य उपादान है।

प्रश्न 6.
भूमि उत्पादन का असीमित/सीमित साधन है। (2012)
उत्तर:
सीमित

प्रश्न 7.
क्या भूमि साधन एवं साध्य दोनों है?
उत्तर:
नहीं

प्रश्न 8.
क्या भूमि का मूल्य उसकी स्थिति पर निर्भर करता है?
उत्तर:
हाँ।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
भूमि से आप क्या समझते हैं? (2012)
अथवा
अर्थशास्त्र में भूमि का क्या अर्थ है? (2012)
उत्तर:
भूमि (Land) उत्पादन का सबसे अनिवार्य, महत्त्वपूर्ण तथा निष्क्रिय साधन है। सामान्य भाषा में भूमि का अभिप्राय केवल भूमि की ऊपरी सतह से होता है, परन्तु अर्थशास्त्र में भूमि का अभिप्राय उन समस्त प्राकृतिक उपहारों से है, जिसके अन्तर्गत भूमि की सतह, वायु, प्रकाश, खनिज, जल, आदि प्रकृति-प्रदत्त पदार्थ सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 2.
भूमि की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
भूमि की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1. भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है भूमि को प्रकृति का एक नि:शुल्क उपहार बताया गया है। भूमि के अन्तर्गत भूमि की सतह, जंगल, पहाड़, पठार, नदी-नाले, खनिज, समुद्र, आदि प्रकृति से प्राप्त पदार्थ सम्मिलित हैं, जो हमें निःशुल्क प्राप्त होते हैं।

2. भूमि निष्क्रिय होती है भूमि उत्पत्ति का एक अनिवार्य साधन है, परन्तु यह एक निर्जीव साधन है। भूमि उत्पत्ति की क्रिया में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेती है। इसमें किसी व्यक्ति द्वारा श्रम लगाकर उत्पादन कार्य किया जा सकता है। मनुष्य द्वारा भूमि पर श्रम करके उत्पादन सम्भव हो पाता है।

प्रश्न 3.
भूमि के मूल तत्त्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मार्शल के अनुसार, भूमि में निम्न तत्त्वों को सम्मिलित किया जाता है-

  1. भूमि की ऊपरी सतह जिस पर मनुष्य चलता-फिरता है, घूमता है तथा कार्य करता है, उसे पृथ्वी की ऊपरी सतह कहते हैं। इसमें पर्वत, नदियाँ, जंगल, मैदान, पठार, झील, प्राकृतिक बन्दरगाह, आदि तथा प्राकृतिक वनस्पतियाँ; जैसे-वन, पेड़-पौधे, घास, जीव-जन्तु, पशु-पक्षी, आदि आते हैं।
  2. भूमि की सतह के नीचे इसमें लौहा, कोयला, सोना, तेल, ताँबा, अभ्रक, आदि खनिज पदार्थ आते हैं।
  3. भूमि की सतह के ऊपर इसमें जलवायु, धूप, वर्षा, पानी, सर्दी-गर्मी, आदि आते हैं।

प्रश्न 4.
भूमि के दो महत्त्व लिखिए।
उत्तर:
भूमि के दो महत्त्व निम्नलिखित हैं

  1. यातायात के साधनों के विकास का आधार किसी देश के यातायात व संचार के साधनों का विकास उस देश की भूमि के स्वरूप पर आधारित होता है।
  2. कृषि का आधार भूमि कृषि का आधार है। कृषि कार्य भूमि के बिना नहीं किया जा सकता है। सभी प्रकार के भोज्य-पदार्थ भूमि से ही प्राप्त होते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
भूमि की कार्यक्षमता से क्या आशय है? इसको प्रभावित करने वाले तत्वों को लिखिए।
उत्तर:
भूमि की कार्यक्षमता भूमि का प्रयोग जिस कार्य के लिए होता है, उसके लिए भूमि की उपयुक्तता को भूमि की कार्यक्षमता’ (Efficiency of Land)
कहते हैं; जैसे- उपजाऊ मैदानों में बहने वाली नदियाँ बिजली उत्पादन के लिए उपयुक्त होती हैं। भूमि की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले तत्त्व भूमि की कार्यक्षमता निम्नलिखित तत्त्वों पर निर्भर करती है

1. भूमि सम्बन्धी कानून भूमि के सम्बन्ध में सरकार की नीति एवं भूमि सम्बन्धी कानून का भी भूमि की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है। जहाँ किसानों का भूमि पर पूर्ण स्वामित्व सम्बन्धी कानून होता है, वहाँ किसान | भूमि पर अथक परिश्रम करके भूमि की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

2. भूमि की स्थिति भूमि की स्थिति से भी भूमि की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ता है। शहर से दूर या मुख्य मार्ग से हटकर स्थित भूमि शहर के निकट की भूमि से कम कार्यक्षमता वाली मानी जाती है। शहर के मुख्य मार्ग की भूमि मकान के लिए तथा अल्पविकसित या ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि कृषि के लिए उत्तम होती है। ऐसी स्थिति में यातायात व्यय भी कम होते हैं।

3. प्राकृतिक तत्त्व भूमि के प्राकृतिक गुण; जैसे-उर्वरा शक्ति, जलवायु, सर्य का प्रकाश, मिटटी, वर्षा, भमि की सतह की बनावट आदि से भमि की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। जो भमि जिस कार्य के लिए उपयोगी होती है, उस भूमि पर वही कार्य किया जाए, तो उससे भूमि की कार्यक्षमता अधिक बनी रहती है; जैसे-काली मिट्टी में कपास और भुरभुरी मिट्टी में गेहूं बोने पर भूमि की उत्पादकता में वृद्धि होती है। भूमि की उत्पादन शक्ति प्राकृतिक तत्त्वों पर भी निर्भर करती है।

4. आर्थिक तत्त्व भूमि की कार्यक्षमता पूँजी की मात्रा, भूमि को स्वामित्व, संगठन की योग्यता, कुशलता, आदि से भी प्रभावित होती है।

5. मानवीय प्रयास द्वारा किया गया भूमि सुधार भूमि पर कार्य करने वाले मनुष्यों के प्रयत्नों का भूमि की कार्यक्षमता पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। मनुष्य भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए उर्वरकों का प्रयोग करते हैं तथा सिंचाई के साधनों का विकास करके भूमि के प्रति सुधारात्मक कार्य करते हैं, परन्तु ये कार्य भूमि की उपजाऊ शक्ति को कम करते हैं तथा भूमि का कटाव करते हैं।

6. भूमि को उपजाऊपन भूमि की कार्यक्षमता भूमि की उर्वरा शक्ति से भी प्रभावित होती है।

7. संगठनकर्ता की योग्यता भूमि की कार्यक्षमता एक कुशल संगठनकर्ता पर भी निर्भर करती है। किस भूमि के लिए किस अनुपात में बीज तथा खाद या उर्वरक का प्रयोग किया जाना चाहिए, यह संगठनकर्ता की योग्यता पर ही निर्भर करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
भूमि क्या है? उत्पादन के साधन के रूप में भूमि के प्रमुख लक्षणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2013, 08)
उत्तर:
भूमि का अर्थ भूमि उत्पादन का सबसे अनिवार्य व महत्त्वपूर्ण साधन है। साधारण भाषा में, भूमि का अभिप्राय केवल भूमि की ऊपरी सतह से होता है, परन्तु अर्थशास्त्र में भूमि का अभिप्राय उन समस्त प्राकृतिक उपहारों से है जिसके अन्तर्गत भूमि की सतह, वायु, प्रकाश, खनिज, जल, आदि प्रकृति-प्रदत्त पदार्थ सम्मिलित होते हैं। मार्शल के अनुसार, “भूमि का अर्थ केवल भूमि की ऊपरी सतह से नहीं है, वरन् उन समस्त भौतिक पदार्थों एवं शक्तियों से है, जो प्रकृति ने मनुष्य की सहायतार्थ नि:शुल्क रूप से जल, वायु और प्रकाश के रूप में प्रदान की हैं।”

स्मिथ एवं पैटरसन के अनुसार, “प्रकृति की कोई भी भेट, जिसे हम आवश्यकता की सन्तुष्टि के लिए प्रयोग में लाते हैं, प्राकृतिक साधन या भूमि एस. के. रुद्र के अनुसार, “भूमि में वे समस्त शक्तियाँ सम्मिलित हैं, जिन्हें प्रकृति निःशुल्क उपहारों के रूप में प्रदान करती है।” भूमि की विशेषताएँ या लक्षण भूमि की विशेषताएँ या लक्षण निम्नलिखित

  1. भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है भूमि को प्रकृति का एक नि:शुल्क उपहार बताया गया है। भूमि के अन्तर्गत भूमि की सतह, जंगल, पहाड़, पठार, नदी-नाले, खनिज, समुद्र, आदि प्रकृति से प्राप्त पदार्थ सम्मिलित हैं, जो हमें नि:शुल्क प्राप्त होते हैं।
  2. भूमि निष्क्रिय होती है भूमि उत्पत्ति का एक अनिवार्य साधन है। लेकिन यह एक निर्जीव साधन है। भूमि उत्पत्ति की क्रिया में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेती है। इसमें किसी व्यक्ति द्वारा श्रम लगाकर उत्पादन कार्य किया जा सकता है। मनुष्य द्वारा भूमि पर श्रम करके उत्पादन सम्भव किया जाता है।
  3. भूमि में विविधता पाई जाती है प्रत्येक स्थान का भू-तले अपनी स्थिति व उर्वरा शक्ति के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है; जैसे-कहीं पर उपजाऊ भूमि पाई जाती है, तो कही पर बंजर, कहीं पर लाल मिट्टी पाई जाती है, तो कहीं पर काली मिट्टी।
  4. भूमि सीमित है भूमि की पूर्ति सीमित होती है तथा इसे बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता है। केवल भूमि पर गहन कृषि कार्य करके प्रभावी पूर्ति को बढ़ाया जा सकता है।
  5. भूमि स्थिर है भूमि अपने स्थान पर स्थिर रहती है। यह अपने स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जा सकती है; जैसे-हिमालय पर्वत को उठाकर अमेरिका नहीं ले जाया जा सकता है।
  6. भूमि नाशवान नहीं है निरन्तर खेती करने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है, परन्तु भूमि नष्ट नहीं हो सकती है।
  7. भूमि के विभिन्न उपयोग भूमि के विभिन्न उपयोग; जैसे-खेती, मकान बनाना, कारखाने लगाना, सड़कें बनाना, आदि हो सकते हैं।
  8. भूमि उत्पादन का अनिवार्य साधन भूमि उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण व अनिवार्य साधन है। इसके बिना उत्पादन कार्य करना सम्भव नहीं होता है।
  9. भूमि का मूल्य उसकी स्थिति पर निर्भर करता है भूमि का मूल्य उसकी स्थिति अर्थात् शहर से दूरी, उपजाऊपन, दुर्गम या सुगम स्थान, आदि पर निर्भर करता है; जैसे-शहर के निकट वाली भूमि का मूल्य अधिक होगा, जबकि शहर से दूर स्थित भूमि का मूल्य कम होगा।
  10. भूमि जीवन का आधार भूमि मानव जीवन का आधार है। मानव इसका विभिन्न रूपों में प्रयोग करके अपने जीवन का निर्वाह करता है। जीवन-स्तर की विभिन्न क्रियाओं का आधार ही भूमि है।

प्रश्न 2.
उत्पादन में भूमि का क्या महत्त्व है? भूमि की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
भूमि का महत्त्व उत्पत्ति के अनिवार्य साधन में भूमि का महत्त्व निम्नलिखित है-

  1. यातायात के साधनों के विकास का आधार किसी देश के यातायात व संचार के साधनों का विकास उस देश की भूमि के स्वरूप पर आधारित होता है। समतल भूमि पर परिवहन के साधनों का तेजी से विकास किया जा सकता है।
  2. कृषि का आधार भूमि कृषि का आधार है। कृषि कार्य भूमि के बिना नहीं किया जा सकता है। सभी प्रकार के भोज्य पदार्थ भूमि से ही प्राप्त होते हैं।
  3. जीवित रहने का आधार मनुष्य भूमि पर चलता-फिरता है, काम करता है, मकान बनाता है, खेती करता है, कारखानों की स्थापना करता है। इस प्रकार, मनुष्य भूमि के बिना एक पल भी जीवित नहीं रह सकता है।
  4. औद्योगिक विकास का आधार किसी देश का औद्योगिक विकास भूमि पर ही निर्भर करता है, क्योंकि कारखानों के लिए कच्चा माल, खनिज पदार्थ, जल शक्ति, वायु शक्ति, कोयला, आदि की पूर्ति भूमि के द्वारा ही पूर्ण की जाती है।
  5. प्राथमिक उद्योगों का विकास सभी प्रकार के प्राथमिक उद्योग; जैसे कृषि व खनिज व्यवसाय, मछली व्यवसाय, वन व्यवसाय, आदि भूमि पर ही निर्भर होते हैं। सभी प्रकार के खनिज पदार्थ भी भूमि से ही प्राप्त किए जाते हैं।
  6. आर्थिक सम्पन्नता का सूचक भूमि आर्थिक सम्पन्नता का सूचक होती है। जिस देश के पास जितनी अधिक प्राकृतिक सम्पदा या भूमि होती है, उस देश को उतना ही अधिक सम्पन्न माना जाता है।
  7. रोजगार का आधार भूमि मनुष्य को रोजगार प्रदान करने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। कृषि-प्रधान राष्ट्रों में भूमि का महत्त्व अधिक होता है।
  8. भूमि सम्पूर्ण उत्पादन कार्यों को आधार है भूमि के बिना किसी भी प्रकार का उत्पादन करना असम्भव है। अत: भूमि प्रत्येक प्रकार की उत्पादन गतिविधियों के लिए अनिवार्य है।
  9. विभिन्न वैज्ञानिक कार्यों का आधार मनुष्य भूमि से प्राप्त खनिजों, जल, वायु, आदि को विभिन्न अनुपातों में मिलाकर उससे उपयोगी वस्तुएँ; जैसे दवाइयाँ, मशीनरी, यन्त्र व अन्य वैज्ञानिक विकास की वस्तुएँ बनाता है।
  10. भूमि के द्वारा आय प्राप्ति भूमि के द्वारा आय प्राप्त की जा सकती है। भूमि | के प्रयोगों का विस्तार करके अधिक उत्पादन किया जा सकता है तथा भूमि के वैकल्पिक प्रयोगों द्वारा आय का क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।

भूमि की विशेषताएँ
भूमि का अर्थ भूमि उत्पादन का सबसे अनिवार्य व महत्त्वपूर्ण साधन है। साधारण भाषा में, भूमि का अभिप्राय केवल भूमि की ऊपरी सतह से होता है, परन्तु अर्थशास्त्र में भूमि का अभिप्राय उन समस्त प्राकृतिक उपहारों से है जिसके अन्तर्गत भूमि की सतह, वायु, प्रकाश, खनिज, जल, आदि प्रकृति-प्रदत्त पदार्थ सम्मिलित होते हैं। मार्शल के अनुसार, “भूमि का अर्थ केवल भूमि की ऊपरी सतह से नहीं है, वरन् उन समस्त भौतिक पदार्थों एवं शक्तियों से है, जो प्रकृति ने मनुष्य की सहायतार्थ नि:शुल्क रूप से जल, वायु और प्रकाश के रूप में प्रदान की हैं।”

स्मिथ एवं पैटरसन के अनुसार, “प्रकृति की कोई भी भेट, जिसे हम आवश्यकता की सन्तुष्टि के लिए प्रयोग में लाते हैं, प्राकृतिक साधन या भूमि एस. के. रुद्र के अनुसार, “भूमि में वे समस्त शक्तियाँ सम्मिलित हैं, जिन्हें प्रकृति निःशुल्क उपहारों के रूप में प्रदान करती है।” भूमि की विशेषताएँ या लक्षण भूमि की विशेषताएँ या लक्षण निम्नलिखित

  1. भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है भूमि को प्रकृति का एक नि:शुल्क उपहार बताया गया है। भूमि के अन्तर्गत भूमि की सतह, जंगल, पहाड़, पठार, नदी-नाले, खनिज, समुद्र, आदि प्रकृति से प्राप्त पदार्थ सम्मिलित हैं, जो हमें नि:शुल्क प्राप्त होते हैं।
  2. भूमि निष्क्रिय होती है भूमि उत्पत्ति का एक अनिवार्य साधन है। लेकिन यह एक निर्जीव साधन है। भूमि उत्पत्ति की क्रिया में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेती है। इसमें किसी व्यक्ति द्वारा श्रम लगाकर उत्पादन कार्य किया जा सकता है। मनुष्य द्वारा भूमि पर श्रम करके उत्पादन सम्भव किया जाता है।
  3. भूमि में विविधता पाई जाती है प्रत्येक स्थान का भू-तले अपनी स्थिति व उर्वरा शक्ति के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है; जैसे-कहीं पर उपजाऊ भूमि पाई जाती है, तो कही पर बंजर, कहीं पर लाल मिट्टी पाई जाती है, तो कहीं पर काली मिट्टी।
  4. भूमि सीमित है भूमि की पूर्ति सीमित होती है तथा इसे बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता है। केवल भूमि पर गहन कृषि कार्य करके प्रभावी पूर्ति को बढ़ाया जा सकता है।
  5. भूमि स्थिर है भूमि अपने स्थान पर स्थिर रहती है। यह अपने स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जा सकती है; जैसे-हिमालय पर्वत को उठाकर अमेरिका नहीं ले जाया जा सकता है।
  6. भूमि नाशवान नहीं है निरन्तर खेती करने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है, परन्तु भूमि नष्ट नहीं हो सकती है।
  7. भूमि के विभिन्न उपयोग भूमि के विभिन्न उपयोग; जैसे-खेती, मकान बनाना, कारखाने लगाना, सड़कें बनाना, आदि हो सकते हैं।
  8. भूमि उत्पादन का अनिवार्य साधन भूमि उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण व अनिवार्य साधन है। इसके बिना उत्पादन कार्य करना सम्भव नहीं होता है।
  9. भूमि का मूल्य उसकी स्थिति पर निर्भर करता है भूमि का मूल्य उसकी स्थिति अर्थात् शहर से दूरी, उपजाऊपन, दुर्गम या सुगम स्थान, आदि पर निर्भर करता है; जैसे-शहर के निकट वाली भूमि का मूल्य अधिक होगा, जबकि शहर से दूर स्थित भूमि का मूल्य कम होगा।
  10. भूमि जीवन का आधार भूमि मानव जीवन का आधार है। मानव इसका विभिन्न रूपों में प्रयोग करके अपने जीवन का निर्वाह करता है। जीवन-स्तर की विभिन्न क्रियाओं का आधार ही भूमि है।

प्रश्न 3.
भूमि की उत्पादकता से क्या आशय है? भूमि की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले तत्त्वों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
भूमि की उत्पादकता/कार्यक्षमता

भूमि की कार्यक्षमता भूमि का प्रयोग जिस कार्य के लिए होता है, उसके लिए भूमि की उपयुक्तता को भूमि की कार्यक्षमता’ (Efficiency of Land)
कहते हैं; जैसे- उपजाऊ मैदानों में बहने वाली नदियाँ बिजली उत्पादन के लिए उपयुक्त होती हैं। भूमि की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले तत्त्व भूमि की कार्यक्षमता निम्नलिखित तत्त्वों पर निर्भर करती है

1. भूमि सम्बन्धी कानून भूमि के सम्बन्ध में सरकार की नीति एवं भूमि सम्बन्धी कानून का भी भूमि की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है। जहाँ किसानों का भूमि पर पूर्ण स्वामित्व सम्बन्धी कानून होता है, वहाँ किसान | भूमि पर अथक परिश्रम करके भूमि की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

2. भूमि की स्थिति भूमि की स्थिति से भी भूमि की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ता है। शहर से दूर या मुख्य मार्ग से हटकर स्थित भूमि शहर के निकट की भूमि से कम कार्यक्षमता वाली मानी जाती है। शहर के मुख्य मार्ग की भूमि मकान के लिए तथा अल्पविकसित या ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि कृषि के लिए उत्तम होती है। ऐसी स्थिति में यातायात व्यय भी कम होते हैं।

3. प्राकृतिक तत्त्व भूमि के प्राकृतिक गुण; जैसे-उर्वरा शक्ति, जलवायु, सर्य का प्रकाश, मिटटी, वर्षा, भमि की सतह की बनावट आदि से भमि की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। जो भमि जिस कार्य के लिए उपयोगी होती है, उस भूमि पर वही कार्य किया जाए, तो उससे भूमि की कार्यक्षमता अधिक बनी रहती है; जैसे-काली मिट्टी में कपास और भुरभुरी मिट्टी में गेहूं बोने पर भूमि की उत्पादकता में वृद्धि होती है। भूमि की उत्पादन शक्ति प्राकृतिक तत्त्वों पर भी निर्भर करती है।

4. आर्थिक तत्त्व भूमि की कार्यक्षमता पूँजी की मात्रा, भूमि को स्वामित्व, संगठन की योग्यता, कुशलता, आदि से भी प्रभावित होती है।

5. मानवीय प्रयास द्वारा किया गया भूमि सुधार भूमि पर कार्य करने वाले मनुष्यों के प्रयत्नों का भूमि की कार्यक्षमता पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। मनुष्य भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए उर्वरकों का प्रयोग करते हैं तथा सिंचाई के साधनों का विकास करके भूमि के प्रति सुधारात्मक कार्य करते हैं, परन्तु ये कार्य भूमि की उपजाऊ शक्ति को कम करते हैं तथा भूमि का कटाव करते हैं।

6. भूमि को उपजाऊपन भूमि की कार्यक्षमता भूमि की उर्वरा शक्ति से भी प्रभावित होती है।

7. संगठनकर्ता की योग्यता भूमि की कार्यक्षमता एक कुशल संगठनकर्ता पर भी निर्भर करती है। किस भूमि के लिए किस अनुपात में बीज तथा खाद या उर्वरक का प्रयोग किया जाना चाहिए, यह संगठनकर्ता की योग्यता पर ही निर्भर करता है।

भूमि की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले तत्त्वं भूमि की उत्पादकता को निम्नलिखित तत्त्व प्रभावित करते हैं-

1. सरकारी नीति सरकार द्वारा उचित नीतियाँ अपनाकर भी भूमि की कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सकता है। सरकार द्वारा किसानों को साख-सुविधाएँ, सिंचाई सुविधाएँ, आदि प्रदान की जाती हैं, जिससे किसान उन्नत खाद-बीज खरीदकर भूमि की उत्पादकता को बढ़ाता है।

2. सामाजिक तथा राजनीतिक तत्त्व देश की सामाजिक तथा राजनीतिक परिस्थितियाँ भी भूमि की उत्पादकता पर अपना प्रभाव डालती हैं। भारत में भूमि का उपविभाजन, उपखण्डन की समस्याएँ उत्तराधिकार के नियमों के चलते पनप रही हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता घट रही है। साथ ही राजनीतिक अस्थिरता भी भूमि की उत्पादन क्षमता पर अपना प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

3. उन्नत तकनीक उत्पादन में वैज्ञानिक तथा आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। अत: भूमि की उत्पादन-क्षमता पर उन्नत तकनीकों का प्रयोग अपना प्रभाव डालता है।

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