UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

सामान्य प्रश्न

प्रश्न 1
हिन्दी-काव्य-साहित्य के विविध कालों का समय बताइए।
उत्तर

  1. आदिकाल (वीरगाथाकाल) —– सन् 993 ई० से सन् 1318 ई० तक।
  2. पूर्व-मध्यकाल (भक्तिकाल) – सन् 1318 ई० से सन् 1643 ई० तक।
  3. उत्तर-मध्यकाल (रीतिकाल) – सन् 1643 ई० से सन् 1843 ई० तक।
  4. आधुनिककाल (गद्यकाल) – सन् 1843 ई० से अब तक।

उपर्युक्त काल-विभाजन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के ‘हिन्दी-साहित्य का इतिहास के आधार पर दिया गया है।

प्रश्न 2
कविता के बाह्य तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
कविता के बाह्य तत्त्व हैं—

  1. लय,
  2. तुक,
  3. छन्द,
  4. शब्द-योजना,
  5. चित्रात्मक भाषा तथा
  6. अलंकार

प्रश्न 3
कविता के आन्तरिक तत्त्व कौन-कौन से हैं ?
उत्तर
कविता के आन्तरिक तत्त्व हैं—

  1. अनुभूति की व्यापकता,
  2. कल्पना की उड़ान,
  3. रसात्मकता और सौन्दर्य-बोध तथा
  4. भावों का उदात्तीकरण।

प्रश्न 4 हिन्दी पद्य-साहित्य के इतिहास के विभिन्न कालों के नाम लिखिए।
उत्तर
हिन्दी-पद्य साहित्य के विभिन्न कालों के नाम हैं-

  1. वीरगाथाकाल (आदिकाल),
  2. भक्तिकाल (पूर्व-मध्यकाल),
  3. रीतिकाल (उत्तर-मध्यकाल) एवं
  4. आधुनिककाल।

प्रश्न 5
काव्य के कितने भेद होते हैं ?
उत्तर
काव्य के दो भेद होते हैं–

  1. श्रव्य काव्य और
  2. दृश्य काव्य।

प्रश्न 6
श्रव्य काव्य के कौन-कौन से भेद होते हैं ?
उत्तर
श्रव्य काव्य के दो भेद होते हैं—

  1. प्रबन्ध काव्य और
  2. मुक्तक काव्य।

प्रश्न 7
दृश्य काव्य तथा श्रव्य काव्य का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
दृश्य काव्य का रंगमंच पर अभिनय किया जा सकता है, जब कि श्रव्य काव्य का अभिनय नहीं किया जा सकता। दृश्य काव्य का आनन्द उसे देखकर अथवा सुनकर लिया जा सकता है, जब कि श्रव्य काव्य का आनन्द केवल सुनकर ही लिया जा सकता है।

प्रश्न 8
प्रबन्ध काव्य के कितने भेद होते हैं ?
उत्तर
प्रबन्ध काव्य के दो भेद होते हैं—

  1. महाकाव्य और
  2. खण्डकाव्य।

प्रश्न 9
महाकाव्य और खण्डकाव्य में अन्तर बताइए।
उत्तर
महाकाव्य की कथा में जीवन की सर्वांगीण झाँकी होती है, जब कि खण्डकाव्य में जीवन के एक पक्ष का चित्रण होता है। महाकाव्य की विस्तृत कथावस्तु पर अनेक खण्डकाव्य लिखे जा सकते हैं।

प्रश्न 10
दो महाकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर दो महाकाव्यों के नाम हैं—

  1. श्रीरामचरितमानस और
  2. कामायनी।

प्रश्न 11
दो खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर
दो खण्डकाव्यों के नाम हैं-

  1. जयद्रथ-वध और
  2. हल्दीघाटी।

आदिकाल (वीरगाथाकाल)

प्रश्न 12
हिन्दी के आदिकाल का समय निर्देश कीजिए और हिन्दी के प्रथम कवि का नाम बताइए।
उत्तर
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार आदिकाल का समय 993 ई० से 1318 ई० तक माना जाता है। सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है।

प्रश्न 13
हिन्दी का प्रथम कवि किसे माना जाता है ? उनका रचना-काल कब से प्रारम्भ हुआ ?
उत्तर
सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। उनका रचना-काल 769 ई० से प्रारम्भ हुआ। कुछ विद्वान् हिन्दी का प्रथम कवि ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता चन्दबरदाई को मानते हैं।

प्रश्न 14 आदिकाल (वीरगाथाकाल) की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। [2009]
या
आदिकालीन हिन्दी-साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
या
आदिकाल (वीरगाथाकाल) की रचनाओं की दो प्रमुख काव्य-प्रवृत्तियाँ लिखिए।
या
आदिकाल के योगदान की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
आदिकाल के रासो साहित्य की प्रमुख विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर
विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ)-

  1. आदिकाल में अधिकांश रासो ग्रन्थ लिखे गये; जैसेपृथ्वीराज रासो, परमाल रासो आदि। इनमें आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा है।
  2. वीर और श्रृंगार रस की प्रधानता है।
  3. युद्धों का सजीव वर्णन किया गया है।
  4. काव्यभाषा के रूप में डिंगल और पिंगल का प्रयोग हुआ है।
  5. काव्य-शैलियों में प्रबन्ध और गीति शैलियों का प्रयोग मिलता है।
  6. सामूहिक राष्ट्रीय भावना का अभाव रहा है।

प्रश्न 15
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवियों और उनकी कृतियों के नाम बताइए। आदिकाल की रचना है। [2011]
या
आदिकाल के रचनाकार हैं। [2011]
या
आदिकाल के दो रचनाकारों के नाम लिखिए। [2015]
उत्तर
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैंचन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो), नरपति-नाल्ह (बीसलदेव रासो), दलपति विजय (खुमान रासो), जगनिक (परमाल रासो या आल्ह खण्ड), विद्यापति (पदावली), अब्दुल रहमान (सन्देश रासक), स्वयंभू (पउमचरिउ), धनपाल (भविसयत्तकहा), जोइन्दु (परमात्मप्रकाश), पुष्पदन्त (उत्तरपुराण) एवं अमीर खुसरो की फुटकर रचनाएँ।

प्रश्न 16
वीरगाथाकाल (आदिकाल) की रचनाओं में वर्णित विषय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
आदिकाल के साहित्य में रणोन्मत्त राजपूत वीरों, रणबाँकुरों, राजपूत महिलाओं, रण-स्थल के रक्तरंजित क्रियाकलापों, गर्जन-तर्जन व हाहाकार का सजीव चित्रण है।

प्रश्न 17
वीरगाथाकाल (आदिकाल) में साहित्य रचना की प्रमुख धाराओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
इस काल की तीन प्रमुख काव्यधाराएँ निम्नलिखित हैं

  1. संस्कृत काव्यधारा,
  2. प्राकृत एवं अपभ्रंश काव्यधारा तथा
  3. हिन्दी काव्यधारा।

प्रश्न 18
आदिकाल के विभिन्न नाम बताइए।
या
‘वीरगाथाकाल’ के लिए प्रयुक्त दो अतिरिक्त नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
वीरगोथाकाल, अपभ्रंशकाल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल, चारणकाल, बीजवपनकाल एवं सिद्ध-सामन्त युग आदि।।

प्रश्न 19
वीरगाथाकाल में रचनाएँ कौन-कौन-से काव्य-रूपों (विधाओं) में लिखी गयीं ?
उत्तर
प्रबन्ध काव्य और मुक्तक काव्यों के रूप में लिखी गयी हैं।।

प्रश्न 20
वीरगाथाकाल की रचनाओं में कौन-सी भाषा प्रयुक्त हुई है ?
उत्तर
डिंगल और पिंगल।

प्रश्न 21
आदिकाल के साहित्य को कितने वर्गों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर
पाँच वर्गों में—

  1. सिद्ध साहित्य,
  2. जैन साहित्य,
  3. नाथ साहित्य,
  4. रासो साहित्य,
  5. लौकिक साहित्य।

प्रश्न 22
जैन साहित्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप किन ग्रन्थों में मिलता है ?
उत्तर
जैन साहित्य का सर्वाधिक लोकप्रिय रूप ‘रास’ ग्रन्थों में मिलता है।

प्रश्न 23
जैन धर्म के चार रास ग्रन्थों और उनके रचयिताओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. देवसेन रचित ‘श्रावकाचार रास’,
  2. मुनि जिनविजय कृत ‘भरतेश्वर बाहुबली रास’,
  3. जिनधर्मसूरि कृत ‘स्थूलभद्र रास’ तथा
  4. विजयसेन सूरि कृत रेवंतगिरि रास’।

प्रश्न 24
नाथ साहित्य के प्रणेता कौन थे ?
उत्तर
नाथ साहित्य के प्रणेता गोरखनाथ थे।

प्रश्न 25
कवियों तथा उनके ग्रन्थों का सही मेल करें-
कवि–दलपति विजय, चन्दबरदाई, नरपति नाल्ह, नल्हसिंह भाट तथा जगनिक।
ग्रन्थ—पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, विजयपाल रासो, आल्ह खण्ड, खुमान रासो।
उत्तर
कवि ग्रन्थ
दलपति विजय – खुमान रासो [2011]
चन्दबरदाई – पृथ्वीराज रासो [2013]
नरपति नाल्ह बीसलदेव रासो
नल्हसिंह भाट – विजयपाल रासो
जगनिक – आल्ह खण्ड (परमाल रासो) [2014]

भक्तिकाल

प्रश्न 26
भक्तिकाल की सभी प्रमुख काव्यधाराओं का परिचय दीजिए।
उत्तर
भक्तिकाल में हिन्दी-कविता दो धाराओं में प्रवाहित हुई–निर्गुण भक्ति-धारा और सगुण भक्ति-धारा। निर्गुणवादियों में भी जिन्होंने ज्ञान को अपनाया, वे ज्ञानमार्गी और जिन्होंने प्रेम को अपनाया, वे प्रेममार्गी कहलाये।।

जिन कवियों ने भगवान् के दुष्टदलनकारी-लोकरक्षक रूप को सामने रखी, वे रामभक्ति शाखा से सम्बद्ध माने गये और जिन्होंने भगवान् के लोकरंजक रूप को सामने रखा, वे कृष्णभक्ति शाखा के कवि कहलाये।।

प्रश्न 27
भक्तिकाल की प्रमुख काव्यधाराओं और उनके कवियों के नाम लिखिए।
या
भक्तिकाल की विभिन्न धाराओं के नाम बताइट।
उत्तर
भक्तिकाल में दो प्रकार की काव्य-रचना हुई—

  1. निर्गुणमार्गीय तथा
  2. सगुणमार्गीय।

निर्गुण काव्य की दो धाराएँ हैं—
(क) ज्ञानाश्रयी-काव्यधारा तथा
(ख) प्रेमाश्रयी-काव्यधारा।

सगुण काव्य की भी दो धाराएँ हैं—
(क) कृष्णभक्ति-काव्यधारा तथा
(ख) रामभक्ति-काव्यधारा।

प्रश्न 28
सन्तकाव्य का अर्थ स्पष्ट कीजिए। इस धारा के प्रमुख कवि का नाम भी लिखिए।
उत्तर
सन्तकाव्य से आशय निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा से है। ये भक्त निर्गुण-निराकार की उपासना करते हैं और ज्ञान को उसकी प्राप्ति का साधन मानते हैं। इस धारा के प्रमुख कवि हैं—कबीर, रैदास, नानक, दादू, मलूकदास आदि।

प्रश्न 29
भक्तिकाल की निर्गुण तथा सगुण भक्तिधारा का परिचय दीजिए।
उत्तर
जिस धारा में भगवान् के निर्गुण-निराकार रूप की आराधना पर बल दिया गया, वह निर्गुण धारा कहलायी और जिसमें सगुण-साकार रूप की आराधना पर बल दिया गया, वह सगुण धारा कहलायी। निर्गुणवादियों में जिन्होंने भगवत्-प्राप्ति के साधन-रूप में ज्ञान को अपनाया, वे ज्ञानमार्गी और जिन्होंने प्रेम को अपनाया, वे प्रेममार्गी कहलाये। ज्ञानमार्गी शाखा के सबसे प्रमुख कवि कबीर और प्रेममार्गी (सूफी) शाखा के मलिक मुहम्मद जायसी हुए।

प्रश्न 30
ज्ञानाश्रयी निर्गुण (सन्त) काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
या
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख कीजिए।
या
ज्ञानाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। भक्तिकाल की कोई एक विशेषता का उल्लेख कीजिए। [2016]
उत्तर

  1. सद्गुरु का महत्त्व सर्वाधिक; सत्संग पर भी बल।
  2. निर्गुण की उपासना एवं अवतारवाद का खण्डन।
  3. भगवान् के नाम-स्मरण तथा भजन पर बल।
  4. धर्म के क्षेत्र में रूढ़िवाद, बाह्याचार एवं आडम्बर का विरोध तथा सामाजिक क्षेत्र में विषमता, ऊँचे-नीच एवं छुआछूत का खण्डन।
  5. आन्तरिक शुद्धि एवं प्रेम साधना पर बल।
  6. ईश्वर की एकता पर बल; राम-रहीम अभिन्न हैं।

प्रश्न 31
ज्ञानाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर
कवि-कबीर; रचित ग्रन्थ-बीजक, कबीर-ग्रन्थावली।

प्रश्न 32
प्रेमाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ) लिखिए।
या
निर्गुण-पन्थ की प्रेमाश्रयी-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर

  1. मुसलमान होकर भी हिन्दू प्रेमगाथाओं का वर्णन, जिनमें हिन्दू संस्कृति का चित्रण मिलता है।
  2. सूफी सिद्धान्तों का निरूपण।
  3. रहस्यवाद की चरम अभिव्यक्ति।
  4. लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना।
  5. मसनवी शैली का प्रयोग।
  6. पूर्वी अवधी भाषा तथा दोहा-चौपाई छन्दों का प्रयोग।

प्रश्न 33
भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर
सगुण भक्ति में जिन्होंने भगवान् के लोकरंजक रूप को सामने रखा, वे कृष्णोपासक कहलाये तथा जिन्होंने भगवान् के दुष्ट-दलनकारी लोकरक्षक रूप को सामने रखा, वे रामभक्ति शाखा से सम्बद्ध माने गये।

प्रश्न 34
कृष्ण-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइट। या भक्तिकाल की सगुण कृष्णभक्ति शाखा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ बताइट।
उत्तर

  1. श्रीमद्भागवत का आधार लेकर कृष्णलीला-गान।
  2. सख्य, वात्सल्य एवं माधुर्य भाव की उपासना एवं लोकपक्ष की उपेक्षा।
  3. काव्य में श्रृंगार एवं वात्सल्य रसों की प्रधानता; मूल आधार कृष्ण के बाल और किशोर रूप का लीला-वर्णन।
  4. ब्रज भाषा में मुक्तक काव्य-शैली की प्रधानता, जिसमें अद्भुत संगीतात्मकता का गुण विद्यमान है।

प्रश्न 35
कृष्णभक्ति-काव्य में वर्णित प्रमुख रसों का नामोल्लेख करते हुटे उस रचना का नाम भी बताइए, जिसमें उन सभी रसों का सर्वश्रेष्ठ चित्रण हुआ है।
उत्तर
कृष्णभक्ति-काव्य में श्रृंगार रस का सांगोपांग एवं वात्सल्य और भक्ति रसों का प्रयोग प्रमुखता से हुआ है। सूरदास के ‘सूरसागर’ में इन सभी रसों का सर्वश्रेष्ठ चित्रण है।

प्रश्न 36 कृष्ण-काव्यधारा के प्रमुख कवियों के नाम लिखिए। [2009]
या
अष्टछाप के किन्हीं दो कवियों का नाम लिखिए।
उत्तर
अष्टछाप के कवि ही कृष्ण-काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के चार शिष्यों एवं अपने चार शिष्यों को मिलाकर महाप्रभु के सुपुत्र गोसाईं विट्ठलनाथ जी ने अष्टछाप की स्थापना की, जिसके आठ कवि थे-सूरदास, कुम्भनदास, परमानन्ददास, कृष्णदास, छीतस्वामी, गोविन्ददास, चतुर्भुजदास, नन्ददास। इनके अतिरिक्त कृष्ण काव्यधारा के अन्य प्रमुख कवि हैं-मीरा, रसखान, हितहरिवंश और नरोत्तमदास।

प्रश्न 37
राम-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर

  1. लोकसंग्रह (लोकहित) की भावना के कारण मर्यादा की प्रबल भावना।
  2. राम का परब्रह्मत्व।
  3. दास्य भाव की उपासना।
  4. समन्वय की विराट् चेष्टा।
  5. स्वान्त:सुखाय काव्य-रचना।
  6. अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं, प्रबन्ध और मुक्तक दोनों काव्य-शैलियों एवं विविध छन्दों का प्रयोग।

प्रश्न 38
रामाश्रयी शाखा के दो प्रमुख कवियों का नाम दीजिए।
या
राम को नायक मानकर रचना करने वाले दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
गोस्वामी तुलसीदास और आचार्य केशवदास रामाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं। इन दोनों ने राम को नायक मानकर अपने काव्यों की रचना की है।

प्रश्न 39
भक्तिकालीन काव्य को ‘हिन्दी कविता का स्वर्ण युग’ क्यों कहा जाता है ? स्पष्ट कीजिए।
या
हिन्दी साहित्य के विकास में भक्तिकाल के योगदान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
भावों की उदात्तता, महती प्रेरकता, अनुभूति-प्रवणता, लोकहित का मुखरित स्वर, भारतीय संस्कृति का मूर्तिमान रूप, समन्वय की विराट् चेष्टा तथा कलापक्ष की समृद्धि इस काल की ऐसी विशेषताएँ हैं, जो किसी अन्य काल के काव्य में इतनी उच्च कोटि की नहीं मिलतीं। इसीलिए भक्तिकाल को हिन्दी काव्य को स्वर्ण युग कहा जाता है।

प्रश्न 40
भक्तिकाल में भक्तिभावना के कौन-से दो रूप मिलते हैं ?
उत्तर
निर्गुण भक्ति और सगुण भक्ति।

प्रश्न 41
भक्तिकाव्य की दो प्रमुख शाखाओं के नाम लिखिए।

  1. निर्गुण भक्ति-शाखा और
  2. सगुण भक्ति-शाखा।

प्रश्न 42
भक्तिकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कबीरदास, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास और तुलसीदास।

प्रश्न 43
भक्तिकालीन विभिन्न काव्यधाराओं में किस धारा का काव्य सर्वश्रेष्ठ है और उसका सर्वश्रेष्ठ कवि कौन है ?
उत्तर
सर्वश्रेष्ठ काव्यधारा–रामाश्रयी काव्यधारा तथा सर्वश्रेष्ठ कवि–गोस्वामी तुलसीदास।

प्रश्न 44
भक्तिकाल की चार प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए। भक्ति काव्यधारा की दो पुस्तकों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर
बीजक, पद्मावत, सूरसागर तथा श्रीरामचरितमानस।

प्रश्न 45
निर्गुण काव्यधारा की दो शाखाएँ कौन-सी हैं ?
उत्तर

  1. ज्ञानाश्रयी (सन्त) काव्यधारा तथा
  2. प्रेमाश्रयी (सूफी) काव्यधारा।

प्रश्न 46
निर्गुण-काव्यधारा की कोई एक प्रमुख विशेषता बताइए और उसके प्रमुख कवि का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर
निर्गुण काव्य में परम ब्रह्म के निराकार स्वरूप की उपासना हुई तथा ज्ञान एवं प्रेम तत्त्व की प्रधानता रही। कबीर एवं जायसी इस धारा के प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 47
सन्त काव्यधारा के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कबीरदास, रैदास, दादू तथा नानक।

प्रश्न 48
प्रेममार्गी निर्गुण (सूफी) काव्यधारा के प्रमुख कवि का नाम तथा उनकी प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
कवि-मलिक मुहम्मद जायसी। रचना-पद्मावत।।

प्रश्न 49
सूफी काव्यधारा की कुछ प्रमुख कृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर
पद्मावत, मृगावती (कुतुबन), मधुमालती (मंझन), चित्रावली (उसमान) आदि।

प्रश्न 50
सगुण कृष्णभक्ति-शाखा के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
सूरदास, मीरा, रसखान, कुम्भनदास, गोविन्ददास, नरोत्तमदास एवं परमानन्ददास।

प्रश्न 51
कृष्णभक्ति-शाखा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का नाम लिखिए।
या
प्रेमाश्रयी अथवा कृष्णकाव्य की दो प्रमुख काव्य-रचनाओं के नाम बताइट।
या
महाकवि सूरदास की दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. सूरदास-सूरसागर व साहित्यलहरी तथा
  2. मीराबाई नरसी जी का मायरा।

प्रश्न 52
राम-काव्यधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
तुलसीदास राम-काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं। अन्य प्रमुख कवि हैं–केशवदास, नाभादास एवं अग्रदास।।

प्रश्न 53
राम-काव्यधारा की रचना किन भाषाओं में हुई है ?
उत्तर
राम-काव्यधारा की रचना अवधी तथा ब्रजभाषा में हुई है।

प्रश्न 54
ब्रजभाषा तथा अवधी भाषा के मध्यकालीन एक-एक प्रसिद्ध महाकाव्य का नाम लिखिए।
उत्तर

  1. ब्रजभाषा–सूरसागर तथा
  2. अवधी भाषा-श्रीरामचरितमानस।

प्रश्न 55
रामभक्ति-शाखा के किसी एक कवि तथा उसके द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
या
सगुण भक्तिधारा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर
तुलसीदास जी के चार ग्रन्थों के नाम हैं–

  1. श्रीरामचरितमानस,
  2. विनयपत्रिका,
  3. कवितावली तथा
  4. गीतावली।

प्रश्न 56
उत्तर भारत में भक्ति-भावना को प्रवाहित करने का श्रेय किसको है ?
उत्तर
स्वामी रामानन्द तथा महाप्रभु वल्लभाचार्य को।

प्रश्न 57
हिन्दी काव्य के भक्तिकाल की दो प्रमुख धाराओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. निर्गुण काव्यधारा (ज्ञानमार्गी तथा प्रेममार्गी)।
  2. सगुण काव्यधारा (रामभक्ति तथा कृष्णभक्ति)।

प्रश्न 58
ज्ञानमार्गी शाखा के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कबीर तथा
  2. नानक

प्रश्न 59
हिन्दी-साहित्य की भक्तिकालीन ज्ञानाश्रयी शाखा की दो विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
उत्तर

  1. ज्ञानाश्रयी शाखा में निर्गुण ब्रह्म की उपासना हुई तथा
  2. जाति-पाँति, रूढ़ियों और मिथ्याडम्बरों का विरोध हुआ।

प्रश्न 60
निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर

  1. यह फारसी की मसनवी शैली में रचित है तथा
  2. अवधी भाषा में काव्य-रचना हुई।

प्रश्न 61
भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के एक प्रमुख कवि और उसकी एक प्रमुख रचना (महाकाव्य) का नाम लिखिए।
या
प्रेमाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर
कवि–मलिक मुहम्मद जायसी और उनकी रचना का नाम है पद्मावत (महाकाव्य) और अखरावट।

प्रश्न 62
रामभक्ति शाखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर

  1. श्रीराम की प्रतिष्ठा पूर्ण ब्रह्म के रूप में हुई है तथा
  2. यह काव्य ब्रज तथा अवधी दोनों ही भाषाओं में रचा गया।

प्रश्न 63
भक्तिकाल की तीन सामान्य प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. जीव की नश्वरता का समान रूप से वर्णन है।
  2. प्रभु के नाम स्मरण तथा गुरु की महत्ता का वर्णन सभी कवियों ने किया है।
  3. कवियों के नामोल्लेख की प्रवृत्ति रही है।

प्रश्न 64
तुलसीदास द्वारा विरचित दो प्रसिद्ध काव्यकृतियों के नाम लिखिए जिनमें एक अवधी तथा दूसरी ब्रजभाषा की हो।
उत्तर

  1. श्रीरामचरितमानस–अवधी भाषा तथा
  2. विनयपत्रिका-ब्रजभाषा।

रीतिकाल

प्रश्न 65
रीतिकालीन काव्य की प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
या
रीतिकाल की दो प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए। [2015]
उत्तर

  1. राज्याश्रित कवियों द्वारा लक्षण-लक्ष्य पद्धति पर काव्य-रचना की गयी, ये कवि रीतिबद्ध कहलाये। जिन्होंने रीति पद्धति का तिरस्कार कर स्वतन्त्र काव्य-रचना की, वे रीतिमुक्त कवि कहलाये।
  2. श्रृंगार रस की प्रधानता, परन्तु वीर रस का भी ओजस्वी वर्णन।
  3. मुख्यत: मुक्तक शैली एवं ब्रज भाषा का प्रयोग।
  4. भाव पक्ष की अपेक्षा कला पक्ष पर बल।

प्रश्न 66
रीतिबद्ध काव्य के अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए इस प्रवृत्ति की किन्हीं दो रचनाओं और उसके रचयिताओं के नाम लिखिए।
उत्तर
जिस काव्य में काव्य-तत्त्वों का लक्षण देकर उदाहरण रूप में काव्य-रचना प्रस्तुत की जाती है, उसे ‘रीतिबद्ध काव्य’ कहते हैं। इस प्रवृत्ति के दो कवियों की रचनाओं के नाम निम्नलिखित हैं-

  1. रस-विलास–आचार्य चिन्तामणि तथा
  2. कविप्रिया-आचार्य केशवदास।

प्रश्न 67
हिन्दी में रीतिबद्ध और रीतिमुक्त कविता का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
रीतिबद्ध काव्य के अन्तर्गत वे ग्रन्थ आते हैं, जिनमें काव्य-तत्त्वों के लक्षण देकर उदाहरण के रूप में काव्य-रचनाएँ की जाती हैं, जब कि रीतिमुक्त काव्यधारा की रचनाओं में रीति–परम्परा के साहित्यिक बन्धनों एवं रूढ़ियों से मुक्त; स्वच्छन्द रचनाएँ। इस काव्यधारा के कवियों में घनानन्द का प्रमुख स्थान है और रीतिबद्ध काव्यकारों में आचार्य चिन्तामणि का प्रथम स्थान है।

प्रश्न 68
रीतिकाल में कौन-कौन-सी काव्यधाराएँ मिलती हैं ?
उत्तर

  1. रीतिबद्ध काव्यधारा तथा
  2. रीतिमुक्त काव्यधारा।

प्रश्न 69
रीतिकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए। [2011]
उत्तर
केशवदास, बिहारीलाल, देव एवं घनानन्द।

प्रश्न 70
रीतिकाल में वीर रस का प्रमुख कवि कौन था ? उसकी रचनाओं के नाम लिखिए। [2011]
उत्तर
रीतिकाल में वीर रस में रचना करने वाले प्रमुख कवि ‘भूषण’ थे। उनकी प्रमुख रचनाओं के नाम है-‘शिवराज भूषण’, ‘शिवा बावनी’, ‘शिवा शौर्य’, ‘छत्रसाल दशक आदि।

प्रश्न 71
केशवदास की दो प्रमुख काव्य-रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1.  रामचन्द्रिका तथा
  2. कविप्रिया।

प्रश्न 72
रीतिकाल की दो काव्यकृतियों और उनके रचनाकारों के नाम लिखिए। [2008]
उत्तर

  1. सतसई-बिहारी तथा
  2. रामचन्द्रिका–केशवदास।

प्रश्न 73
रीतिकाल की पाँच प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. बिहारी-सतसई,
  2. रसराज (मतिराम),
  3. शिवराजभूषण (भूषण),
  4. भावविलास (देव) तथा
  5. घनानन्द कवित्त।

प्रश्न 74
रीतिकाल के चार रीतिबद्ध कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकालीन किसी एक कवि का नाम लिखिए। [2011]
उत्तर

  1. चिन्तामणि,
  2. मतिराम,
  3. भूषण तथा
  4. देव

प्रश्न 75
रीतिकाल के चार रीतिमुक्त कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. घनानन्द,
  2. ठाकुर,
  3. बोधा तथा
  4. आलम।

प्रश्न 76
निम्नलिखित कवियों में से रीतिबद्ध तथा रीतिमुक्त कवियों का चुनाव कीजिए
(क) भूषण,
(ख) घनानन्द,
(ग) बिहारी,
(घ) बोधा ठाकुर,
(ङ) आचार्य केशवदास।
उत्तर
(1) रीतिबद्ध कवि-(ङ) आचार्य केशवदास, (ग) बिहारी, (क) भूषण।
(2) रीतिमुक्त कवि-(ख) घनानन्द तथा (घ) बोधा ठाकुर।

प्रश्न 77
रीतिकाव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा।
  2. श्रृंगार और वीर रस की प्रधानता।
  3. रीतिकाल की कविता का प्रमुख स्वर श्रृंगार का था।
  4. रीतिकाल के कवियों ने नारी को भोग्या रूप में प्रस्तुत किया।

प्रश्न 78
रीतिमुक्त काव्य से आप क्या समझते हैं ? इस काव्यधारा की मुख्य प्रवृत्तियाँ लिखिए।
उत्तर
रीतिकालीन परम्परा पर आधारित रूढ़ियों एवं साहित्यिक बन्धनों से मुक्त काव्य को रीतिमुक्त काव्य कहा जाता है। इस काव्यधारा की मुख्य प्रवृत्तियाँ हैं—

  1. शास्त्रीय मान्यताओं एवं रूढ़ियों से मुक्त स्वच्छन्द काव्य-रचना,
  2. कल्पना की प्रचुरता एवं सांकेतिकता,
  3. अनुभूति, आवेश आदि को विशेष महत्त्व इत्यादि।

प्रश्न 79
रीतिकाल के किन्हीं दो आचार्य कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकाल के किसी आचार्य कवि की एक रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. आचार्य केशव-रामचन्द्रिका तथा
  2. आचार्य चिन्तामणि-रस-विलास।

प्रश्न 80
रीतिकाल में काव्य-रचना जिन छन्दों में की गयी है उनमें से किन्हीं दो प्रमुख छन्दों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कवित्त तथा
  2. सवैया।

आधुनिककाल

प्रश्न 81
कविता के आधुनिककाल के प्रथम युग का नाम लिखिए तथा उस युग के एक प्रमुख कवि का नाम बताइट।
उत्तर
कविता के आधुनिककाल का प्रथम युग–भारतेन्दु युग। प्रमुख कवि-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

प्रश्न 82
पुनर्जागरण काल (भारतेन्दु युग) का समय लिखिए।
उत्तर
सन् 1857 से 1900 ई० तक।

प्रश्न 83
भारतेन्दु युग के दो कवियों के नाम उनकी एक-एक रचनासहित लिखिए।
या
भारतेन्दु युग के किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र-प्रेम माधुरी तथा
  2. श्रीधर पाठक–वनाष्टक।

प्रश्न 84
निम्नलिखित में से किन्हीं दो की एक-एक प्रसिद्ध काव्य-रचना का नाम लिखिए
(1) महादेवी वर्मा,
(2) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’,
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,
(4) केशवदास।
उत्तर
(1) महादेवी वर्मा-‘दीपशिखा’।
(2) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’-‘परिमल’।
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र-‘प्रेम-फुलवारी’।
(4) केशवदास-‘रामचन्द्रिका’।

प्रश्न 85
द्विवेदीकालीन दो प्रमुखतम महाकाव्यों के नाम लिखिए।
या
आधुनिककाल के दो महाकाव्यों और उनके रचयिताओं के नाम बताइए।
उत्तर

  1. साकेत – मैथिलीशरण गुप्त।
  2. प्रियप्रवास – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

प्रश्न 86
द्विवेदीयुगीन कविता की दो प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर
द्विवेदी युग के काव्य की दो विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) निम्नलिखित हैं-

  1. काव्य में ब्रजभाषा के स्थान पर खड़ी बोली की प्रतिष्ठा हुई।
  2. स्वदेश प्रेम तथा स्वदेशी गौरव पर काव्य-रचनाएँ की गयीं।

प्रश्न 87
कविता के आधुनिककाल के द्वितीय युग का नाम तथा उस युग के एक प्रमुख कवि तथा एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर
आधुनिककाल के द्वितीय युग का नाम द्विवेदी युग’ है। कवि–मैथिलीशरण गुप्त; रचना–साकेत।

प्रश्न 88
द्विवेदी युग के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. मैथिलीशरण गुप्त तथा
  2. अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

प्रश्न 89
द्विवेदी युग की समय-सीमा बताइए।
उत्तर
द्विवेदी युग की समय-सीमा 1900 ई० से 1918 ई० तक है।

प्रश्न 90
द्विवेदीयुगीन काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की दो-दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. श्री मैथिलीशरण गुप्त; रचनाएँ–भारत-भारती तथा यशोधरा,
  2. श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध’; रचनाएँ—रुक्मिणी परिणय तथा वैदेही वनवास।

प्रश्न 91
कविता के आधुनिककाल के तृतीय युग का नाम लिखिए तथा उस युग के एक प्रमुख कवि का नाम लिखिए।
उत्तर
कविता के आधुनिककाल के तृतीय युग का नाम ‘छायावादी युग’ है तथा इस युग के प्रमुख कवि श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं।

प्रश्न 92
छायावादी काव्य की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो छायावादी कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. मूलतः सौन्दर्य और प्रेम का काव्य,
  2. प्रकृति का मानवीकरण,
  3. अज्ञात के प्रति जिज्ञासा (रहस्यवादी प्रवृत्ति),
  4. नारी की महिमा का वर्णन,
  5. राष्ट्रीयता की भावना,
  6. वैराग्य, वेदना और पलायनवादिता,
  7. प्रतीकात्मकता और लाक्षणिकता,
  8. चित्रात्मकता,
  9. प्रगतिमयता तथा
  10. खड़ी बोली का अतिशय परिमार्जन।

दो छायावादी कवियों के नाम-

  1. जयशंकर प्रसाद तथा
  2. सुमित्रानन्दन पन्त।

प्रश्न 93
छायावादी कविता के हास के कारण लिखिए।
उत्तर
विदेशी शासन के दमन के कारण जनसाधारण की निरन्तर बढ़ती पीड़ा छायावाद के ह्रास का मुख्य कारण बनी। इस दमन को देखकर कविगण कल्पना लोक से उबरकर यथार्थ के कठोर धरातल पर आ गये। पूँजी की वृद्धि तथा दीनता का प्रसार भी छायावाद के ह्रास का कारण बना।

प्रश्न 94
छायावाद काल की समय-सीमा बताइए।
उत्तर
सन् 1918 से 1938 ई० तक का समय छायावाद के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 95
छायावाद के चार कवि और उनकी दो-दो रचनाएँ लिखिए।
या
पायावाद के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. जयशंकर प्रसाद कामायनी; आँसू,
  2. सुमित्रानन्दन पन्त-पल्लव; ग्राम्या,
  3. सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’–परिमल; गीतिका,
  4. महादेवी वर्मा–दीपशिखा; सान्ध्य-गीत।।

प्रश्न 96
दो रहस्यवादी कवि और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. सुमित्रानन्दन पन्त कृत ‘पल्लव’ तथा
  2. महादेवी वर्मा कृत ‘दीपशिखा’।

प्रश्न 97
छायावादी कविता के हास के कारण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर

  1. छायावादी कविता में सूक्ष्म और वायवीय कल्पनाओं की अधिकता थी।
  2. स्थूल जगत की कठोर वास्तविकता से उसका कोई सम्बन्ध नहीं रह गया था।
  3. समाज में पूँजी के विरुद्ध आवाज उठ रही थी, इसलिए अतिशय कल्पना को छोड़ रोटी, कपड़ा और मकान कविता का विषय बनने लगे थे।

प्रश्न 98
निम्नलिखित कवियों की एक-एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, सुमित्रानन्दन पन्त, रामधारी सिंह ‘दिनकर’।
उत्तर

  1. जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, रचना-गंगावतरण।
  2. सुमित्रानन्दन पन्त, रचना-चिदम्बरी।
  3. रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रचना–उर्वशी।

प्रश्न 99
निम्नलिखित कवियों में से किन्हीं दो द्वारा रचित एक-एक महाकाव्य का नाम लिखिए
(1) चन्दबरदाई,
(2) तुलसीदास,
(3) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’,
(4) रामधारी सिंह ‘दिनकर’।।
उत्तर
(1) पृथ्वीराज रासो,
(2) श्रीरामचरितमानस,
(3) प्रियप्रवास तथा
(4) कुरुक्षेत्र।

प्रश्न 100
बिहारी, मैथिलीशरण गुप्त, अज्ञेय, रत्नाकर, पन्त, दिनकर में से किन्हीं दो की एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर
अज्ञेय–आँगन के पार द्वार। जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’-उद्धवशतक।

प्रश्न 101
आधुनिक युग (छायावादी काव्यधारा) के किसी एक महाकाव्य और उसके रचनाकार का नाम लिखिए।
या
‘कामायनी’ महाकाव्य के सर्गों के नाम लिखिए। [2013]
उत्तर
महाकाव्य-कामायनी; रचनाकार–जयशंकर प्रसाद।
‘कामायनी’ महाकाव्य के सर्गों के नाम हैं—

  1. चिन्ता,
  2. आशा,
  3. श्रद्धा,
  4. काम,
  5. वासना,
  6. लज्जा ,
  7. कर्म,
  8. ईष्र्या,
  9. इडा,
  10. स्वप्न,
  11. संघर्ष,
  12. निर्वेद,
  13. दर्शन,
  14. रहस्य तथा
  15. आनन्द

प्रश्न 102
प्रगतिवादी काव्य का परिचय दीजिए।
उत्तर
प्रगतिवादी काव्य का उद्भव छायावादी काव्य की काल्पनिक एवं भावुकतापूर्ण अभिव्यक्ति के विद्रोहस्वरूप हुआ। इस वाद के काव्यों में स्थूल जगत् की वास्तविकता, सामाजिक-आर्थिक विसंगतियों एवं वर्ग-शोषण के स्वर को अलंकारविहीन तथा सरल रूप में अभिव्यक्ति दी गयी।

प्रश्न 103
प्रगतिवादी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
या
प्रगतिवादी काव्य की दो प्रमुख प्रवृत्तियों (विशेषताओं) का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. साम्यवाद का काव्यात्मक रूपान्तर (अर्थात् मार्क्स और रूस का गुणगान, पूँजीवाद का विरोध एवं कृषक-मजदूर-राज्य की स्थापना का स्वप्न),
  2. यथार्थवाद,
  3. परम्पराओं और रूढ़ियों का विरोध,
  4. धर्म और ईश्वर में अविश्वास,
  5. श्रम की महत्ता की स्थापना,
  6. शोषितों के प्रति सहानुभूति,
  7. वेदना और निराशा,
  8. नारी के प्रति आधुनिक यथार्थवादी दृष्टिकोण,
  9. जन-भाषा का आग्रह तथा
  10. छन्दों और अलंकारों का बहिष्कार।

प्रश्न 104
प्रगतिवाद के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
या
प्रगतिवादी काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
नागार्जुन (युगधारा), केदारनाथ अग्रवाल (युग की गंगा), शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ (प्रलयसृजन), त्रिलोकचन्द शास्त्री (धरती)।

प्रश्न 105
प्रगतिवादी युग के दो कवियों तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर

  1. रामधारी सिंह ‘दिनकर’-उर्वशी तथा
  2. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’–विन्ध्य हिमालय से।।

प्रश्न 106
छायावादोत्तर काल की कविता का काल-विभाजन लिखिए।
उत्तर
(क) प्रगतिवाद, प्रयोगवाद (1938-1959 ई०);
(ख) नयी कविता का काल (1959 ई० से वर्तमान तक)।।

प्रश्न 107
प्रयोगवादी कविता की मुख्य विशेषताएँ बताइए। या छायावादोत्तर काल की काव्य-प्रवृत्तियाँ लिखिए।
उत्तर

  1. अति वैयक्तिकता,
  2. निराशा, कुण्ठा और घुटन,
  3. फ्रायड के प्रभाववश नग्न यौन-चित्रण,
  4. अतियथार्थवाद (नग्न यथार्थ),
  5. पराजय, पलायन और वेदना,
  6. बौद्धिकता,
  7. क्षण का महत्त्व,
  8. अवचेतन के यथावत् प्रकाशन का आग्रह,
  9. अनगढ़ भाषा का प्रयोग एवं
  10. नया शिल्पविधान (नये उपमानों, बिम्बों, प्रतीकों का प्रयोग तथा छन्दहीनता का आग्रह)।

प्रश्न 108
प्रयोगवाद से आप क्या समझते हैं ? ‘नयी कविता’ क्या है ?
उत्तर
सन् 1943 में प्रकाशित ‘तारसप्तक’ की कविताओं में नये बिम्ब-विधानों, नये अलंकारों और नयी भावाभिव्यक्ति को अपनाया गया। काव्य की इसी नयी विधा को ‘प्रयोगवादी काव्य’ के नाम से अभिहित किया गया। नयी कविता इस प्रयोगवादी कविता का ही विकसित रूप है।

प्रश्न 109
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि का नामोल्लेख कीजिए और उनके एक प्रमुख प्रकाशन का नाम लिखिए। [2011]
उत्तर
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय हैं। इन्होंने ‘तारसप्तक’ नामक एक काव्य-संकलन सन् 1943 ई० में प्रकाशित किया। ‘कितनी नावों में कितनी बार इनकी एक प्रमुख रचना है, जिस पर इन्हें ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार की प्राप्ति हुई है।

प्रश्न 110
प्रथम तारसप्तक के कवियों के नाम लिखिए।
या
हिन्दी में प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, गजानन माधव मुक्तिबोध’, गिरिजाकुमार माथुर, प्रभाकर माचवे, नेमिचन्द्र जैन, भारत भूषण और रामविलास शर्मा। सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने इन सात कवियों की रचनाएँ ‘तारसप्तक’ के नाम से सन् 1943 ई० में प्रकाशित कीं।

प्रश्न 111
‘तारसप्तक’ का प्रकाशन किसने और किस समय किया? इसके सम्पादक कौन थे ?
उत्तर
श्री सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने सन् 1943 ई० में अपनी पीढ़ी के अन्य छ: कवियों के सहयोग से ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन किया। इसके सम्पादक श्री सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ स्वयं थे।

प्रश्न 112
‘तारसप्तक’ की कविताएँ किस काव्यधारा से सम्बन्धित हैं ?
उत्तर
‘तारसप्तक’ की कविताएँ प्रयोगवादी काव्यधारा से सम्बन्धित हैं।।

प्रश्न 113
‘दूसरा सप्तक’ के कवियों के नाम लिखिए। यह कब प्रकाशित हुआ ? [2016]
उत्तर
‘दूसरा सप्तक’ में भवानी प्रसाद मिश्र, शकुन्त माथुर, हरिनारायण व्यास, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय तथा धर्मवीर भारती की कविताएँ संकलित थीं। इस सप्तक की रचनाओं में आत्मान्वेषण पर बल दिया गया था तथा यह सन् 1951 ई० में प्रकाशित हुआ।

प्रश्न 114
‘तीसरा सप्तक’ के कवियों के नाम लिखिए। यह कब प्रकाशित हुआ ? या तीसरा सप्तक के प्रकाशन-वर्ष का उल्लेख कीजिए। | [2012, 14, 17]
उत्तर
‘तीसरा सप्तक’ के अन्तर्गत प्रयागनारायण त्रिपाठी, कीर्ति चौधरी, मदन वात्स्यायन, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण, विजयदेव नारायण साही तथा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाएँ संकलित हैं। इस सप्तक की कविताओं में सौन्दर्यवादी प्रवृत्ति के साथ-साथ युगीन सत्य की भी निश्छल अभिव्यक्ति मिलती है। इसका प्रकाशन सन् 1959 ई० में हुआ।

प्रश्न 115
‘चौथा सप्तक’ कब प्रकाशित हुआ ? इसके कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
सन् 1979 ई० में चौथा सप्तक प्रकाशित हुआ। इसमें अवधेश कुमार, राजकुमार कुम्भज, स्वदेश भारती, नन्दकिशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम वर्मा, राजेन्द्र किशोर की रचनाएँ संकलित हैं।

प्रश्न 116
प्रयोगवादी काव्य की पाँच रचनाओं और रचयिताओं के नाम लिखिए।
या
प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए। उत्तर भग्नदूत (सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’), चाँद का मुँह टेढ़ा (गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’); ओ अप्रस्तुत मन (भारतभूषण अग्रवाल), धूप के धान (गिरिजाकुमार माथुर), गीतफरोश (भवानीप्रसाद मिश्र)।।

प्रश्न 117
आधुनिक युग की कविता की चार मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर

  1. यथार्थ का उन्मुक्त चित्रण,
  2. नारी-मुक्ति का आह्वान,
  3. लघुता के प्रति सजगता और
  4. गेय तत्त्व की अवहेलना।

प्रश्न 118
आधुनिक कविता के प्रमुख वादों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, हालावाद, स्वच्छन्दतावाद आदि आधुनिक कविता के प्रमुख वाद हैं।

प्रश्न 119
नयी कविता से आप क्या समझते हैं ? इसके आरम्भ होने का समय लिखिए। [2013]
उत्तर
इसका आरम्भ सन् 1954 ई० में जगदीश गुप्त और डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी के सम्पादन में ‘नयी कविता’ के प्रकाशन से हुआ। यह कविता किसी वाद से बँधकर नहीं चलती।

प्रश्न 120
नयी कविता को अकविता क्यों कहा जाता है ?
उत्तर
नयी कविता परम्परागत कविता के स्वरूप से नितान्त भिन्न हो गयी है। यह किसी वाद या दर्शन से जुड़ी नहीं है, इसलिए इसे अकविता कहा जाता है।

प्रश्न 121
नयी कविता की किन्हीं दो प्रमुख रचनाओं का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. युग की गंगा-केदारनाथ अग्रवाल तथा
  2. बूंद एक टपकी-भवानीप्रसाद मिश्र।।

प्रश्न 122
‘नयी कविता’ से सम्बन्धित किन्हीं दो पत्रिकाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कल्पना’ तथा
  2. ‘ज्ञानोदय’।

प्रश्न 123
नयी कविता के पाँच प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर
जगदीश गुप्त, धर्मवीर भारती, नरेश मेहता, लक्ष्मीकान्त वर्मा तथा सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।

प्रश्न 124
नयी कविता की विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो प्रतिनिधि कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
नयी कविता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यथार्थता,
  2. वर्जनाओं से मुक्ति (अर्थात् सामाजिक मर्यादाओं एवं बन्धनों का तिरस्कार करके नि:संकोचे अश्लील चित्रण),
  3. हृदयपक्ष की अपेक्षा बुद्धिपक्ष की प्रधानता,
  4. निराशा तथा अवसाद (खिन्नता) की प्रबलता,
  5. खिचड़ी भाषा, जिसमें हिन्दी की विभिन्न बोलियों, प्रादेशिक भाषाओं एवं अंग्रेजी आदि के शब्दों का घालमेल तथा
  6. प्रतीकों, बिम्बों एवं मुक्त छन्द पर बल। | नयी कविता के दो प्रतिनिधि कवि हैं-जगदीश गुप्त और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।।

प्रश्न 125
नवगीत’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
‘नवगीत’ छायावादी एवं प्रगतिवादी दोनों ही काव्यों की कई विशेषताओं से युक्त ऐसा काव्य है, जिसमें आधारभूत चेतना, जीवन-दृष्टि, भाव-भूमि एवं अभिव्यंजना शैली की व्यापकता, सूक्ष्मता, विविधता, यथार्थता एवं लौकिकता का एकान्तिक संयोग है।

प्रश्न 126
‘नवगीत’ की किन्हीं दो आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
नवगीत की दो आधारभूत विशेषताएँ हैं-

  1. सर्वत्र भावानुकूल भाषा का प्रयोग तथा
  2. स्वस्थ बिम्ब एवं प्रतीक विधान।।

प्रश्न 127
नवगीत’ के दो महत्त्वपूर्ण गीतकारों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर
नवगीत’ के दो महत्त्वपूर्ण गीतकार और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. शम्भूनाथ सिंह (‘उदयाचल’, ‘दिवालोक’, ‘समय की शिला पर’, ‘जहाँ दर्द नील हैं’ आदि।) तथा
  2. वीरेन्द्र मिश्र (‘गीतम’, ‘लेखनी बेला’, ‘अविराम चल मधुवन्ति’ आदि।)

प्रश्न 128
नवगीतधारा के प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर
रमानाथ अवस्थी, डॉ० शम्भूनाथ सिंह, श्रीपाल सिंह ‘क्षेम’, गुलाब खण्डेलवाल, सुमित्राकुमारी सिन्हा, शान्ति मेहरोत्रा, हंसकुमार तिवारी, सोम ठाकुर, गोपालदास नीरज’, वीरेन्द्र मिश्र तथा डॉ० कुँवर बेचैन।

प्रश्न 129
साठोत्तरी कविता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
साठोत्तरी कविता मोह-भंग, आक्रोश, अस्वीकार, तनाव और विद्रोह की कविता है। इसको मुहावरा नया है, शैली बेपर्द है और इसमें जिजीविषा का गहरा रंग है।

प्रश्न 130
साठोत्तरी कविता की किन्हीं दो आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
साठोत्तरी कविता की दो आधारभूत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  1. अन्याय के विरुद्ध और शासन द्वारा कही जाने वाली चिकनी-चुपड़ी बातों की आक्रोशयुक्त स्वर में अभिव्यक्ति तथा
  2. व्यक्ति और उसके परिवेश की हर परत की बेपर्द अभिव्यक्ति।

प्रश्न 131
साठोत्तरी कविता के किन्हीं दो प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर
साठोत्तरी कविता के दो महत्त्वपूर्ण कवि और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं–

  1. धूमिल (‘संसद से सड़क तक’, ‘कल सुनना मुझे’, ‘सुदामा पाण्डे का प्रजातन्त्र’ आदि) तथा
  2. रामदरश मिश्र (‘पथ के गीत’, ‘बैरंग बेनाम चिट्ठियाँ’, ‘पक गयी है धूप’, ‘कन्धे पर सूरज’ आदि)।

प्रश्न 132
‘नया दोहा’ के प्रमुख संकलनों के नाम लिखिए।
उत्तर
नया दोहा’ के प्रमुख संकलनों के नाम निम्नलिखित हैं

  1. अमलतास की छाँव (पाल भसीन),
  2. आँखों खिले पलाश (पं० देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’),
  3. कटुक सतसई (विश्वप्रकाश दीक्षित ‘बटुक’),
  4. कालाय तस्मै नमः (भारतेन्दु मिश्र) आदि।

प्रश्न 133
वर्तमान युग के पाँच जीवित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
वर्तमान युग के पाँच जीवित कवियों के नाम हैं—पं० देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’, पाल भसीन, विश्वप्रकाश दीक्षित ‘बटुक, भारतेन्दु मिश्र और दिवाकर आदित्य शर्मा।।

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